Bee keeping

मधुमक्खी पालन से किसान घनश्याम के जीवन में घुली मिठास

गंजबासौदा। मेडिकल शॉप छोड़कर मधुमक्खी पालन को रोजगार के रूप में अपनाना अपने आप में आश्चर्यचकित कर देने वाली बात है। इसे सार्थक कर रहे हैं, गंजबासौदा के ग्राम बरेठ के निवासी घनश्याम गुप्ता। मधुमक्खी पालन में अपना सपना देखने वाले घनश्याम गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने मधुमक्खी पालन को नवाचार के घटक के रूप में देखा था। शुरूआत में यह कार्य 1 डिब्बे से शुरू हुआ था। यह डिब्बे आत्मा परियोजना बीटीएम सूर्यभान सिंह थानेश्वर के द्वारा प्रदान किए गए थे।

घनश्याम ने इन डिब्बों को खेतों में 2 से 3 माह के लिए रखा ओर सरसों की फसल तैयार की । सरसों सबसे कम लागत में बिना किसी रोग के पैदावार भी अधिक हुई और परागण की प्रक्रिया भी बढ़ी। सर्दियों तक तो ठीक, गर्मी के दिनों में जब फूलों की कमी हो जाती है तो गुप्ता शकर का घोल डिब्बे के पास रखकर मधुमक्खियों का भोजन तैयार कर शहद उत्पादन का कार्य करते हैं।

एक वर्ष में 1 डिब्बे से 40 किलो तक शहद प्राप्त होती है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 500 से 700 रुपए किलो तक होता है। गुणवत्तायुक्त शहद तैयार करने के इस कार्य के लिए विभाग द्वारा प्रशंसा मिली है। इतना ही नहीं घनश्याम इस कार्य  प्रोत्साहित करने के लिए प्रदर्शनियों में जाकर अपनी इस अनूठी पहल का प्रदर्शन कर वाहवाही भी बटोरते हैं। इसे अपनाकर स्वावलंबी कृषक के रूप में पहचान बनाए हैं। मधुमक्खी पालन की इस पद्घति में प्रतिवर्ष 2 लाख रुपए का शुद्घ लाभ हो रहा है साथ ही तिल उत्पादन में सरसों की भी जोड़दार खेती कर लाभ कमा रहे हैं । वे आत्मा परियोजना के इस नवाचार घटक को सर्वश्रेष्ठ पहल के रूप में बताते हैं।

वहीं आत्मा परियोजना के बीटीएम ने कैमरा 24 के माध्यम से किसान भाइयों से अपील की है की वे परम्परागत कृषि में परिवर्तन लाएं साथ ही मधुमक्खी पालन के साथ अतिरिक्त लाभोरपार्जन करें।

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