Maithili Thakur Emotinal Video from Jaipur Temple

जयपुर के मंदिर में भावुक हुईं मैथिली ठाकुर, आँखों से बही आंसुओं की धारा

Maithili Thakur Emotional Video | जयपुर: राजनीति की गहमागहमी और जनसभाओं के शोर से दूर, जब आस्था का सैलाब उमड़ता है तो शब्द कम पड़ जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा जयपुर के ऐतिहासिक आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर में देखने को मिला। बिहार के अलीनगर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक और सुप्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर भगवान के दर्शन के दौरान अपने आंसू नहीं रोक पाईं।

भजनों की स्वर लहरियों के बीच खोईं सुध-बुध

रविवार को मैथिली ठाकुर अपने भाइयों ऋषभ और अयाची ठाकुर के साथ मंदिर परिसर पहुँची थीं। मंदिर में जब ‘आज तो नवेली राधा गोरल पूजण आई छै’ जैसे भक्तिमय भजनों की गूंज हुई, तो मैथिली पूरी तरह भक्ति में सराबोर हो गईं। भगवान की छवि को निहारते हुए वे इतनी भावुक हो गईं कि उनकी आँखों से आंसुओं की धारा बहने लगी। यह कोई सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक भक्त का अपने आराध्य के प्रति निश्छल समर्पण था।

मैथिली ने बाद में सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा:

“आज से पहले मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किया। जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर का वातावरण, भक्तों का उत्साह और भजनों की गूंज ने मन को इतना छुआ कि मैं खुद को संभाल नहीं पाई। ऐसा लगा जैसे मन का सारा बोझ हल्का हो गया हो।”


सियासत और संगीत का अनूठा संगम: मैथिली ठाकुर का सफर

मैथिली ठाकुर की पहचान आज केवल एक मधुर आवाज तक सीमित नहीं है। वे भारतीय राजनीति का एक उभरता हुआ चेहरा भी हैं।

  1. देश की सबसे युवा विधायक: 25 साल की उम्र में मैथिली ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा की अलीनगर सीट से जीत दर्ज कर इतिहास रचा। वे वर्तमान में बिहार की सबसे युवा विधायक हैं।

  2. सांस्कृतिक राजदूत: भारत सरकार ने उन्हें ‘सांस्कृतिक राजदूत’ के रूप में सम्मानित किया है। वे मैथिली, भोजपुरी, हिंदी और राजस्थानी लोक संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिला रही हैं।

  3. जड़ों से जुड़ाव: राजनीति में आने के बाद भी मैथिली अपनी जड़ों को नहीं भूली हैं। जयपुर प्रवास के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की और ‘रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ में भी हिस्सा लिया।

क्यों खास है मैथिली की यह भावुकता?

अक्सर देखा जाता है कि राजनीति में आने के बाद कलाकार अपनी संवेदनशीलता खो देते हैं, लेकिन मैथिली ठाकुर का यह रूप उनके प्रशंसकों को काफी प्रेरित कर रहा है। जयपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे सोशल मीडिया ट्रोलर्स पर ध्यान नहीं देतीं और अपनी ऊर्जा भक्ति और सेवा में लगाती हैं।


निष्कर्ष:

आंसुओं की ये धार इस बात का प्रमाण है कि इंसान चाहे किसी भी ऊंचे पद पर क्यों न पहुँच जाए, आध्यात्मिकता और भक्ति ही उसे मानसिक शांति प्रदान करती है। मैथिली की इस सादगी और अटूट श्रद्धा पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं।

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