देपालपुर से स्विट्ज़रलैंड तक जुड़ी ‘भक्ति की डोर’

special rakhi for sawariya seth

देपालपुर। भगवान सांवरिया सेठ के प्रति भक्तों की आस्था और श्रद्धा के कई रूप देखने को मिलते हैं। कोई उन्हें अपना मित्र मानता है, कोई बिजनेस पार्टनर तो कोई परिवार के सदस्य की तरह उनसे जुड़ाव महसूस करता है। रक्षाबंधन के अवसर पर आस्था से जुड़ा ऐसा ही एक अनूठा मामला मध्य प्रदेश के देपालपुर में सामने आया है।

हजारों किलोमीटर दूर स्विट्ज़रलैंड में रहने वाली भक्त वंदना कुमारी ने भगवान सांवरिया सेठ को अपना भाई मानते हुए उनके लिए विशेष प्योर सिल्वर राखी तैयार करवाई है। यह खास राखी इंदौर जिले के देपालपुर स्थित श्री नागेश्वर ज्वैलर्स (चांदी वाला) ने तैयार की है।

स्विट्ज़रलैंड से आया सांवरिया सेठ के लिए खास ऑर्डर

स्विट्ज़रलैंड से मिले इस विशेष ऑर्डर ने देपालपुर की पारंपरिक चांदी की कारीगरी को एक अलग पहचान दिलाई है। साथ ही, यह मामला इस बात की भी मिसाल बन गया है कि भगवान सांवरिया सेठ के प्रति भक्तों की आस्था देश की सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंच चुकी है।

श्री नागेश्वर ज्वैलर्स के संचालक अंकित सोनी के मुताबिक, उनके प्रतिष्ठान पर भगवान सांवरिया सेठ के लिए शुद्ध चांदी से कई तरह की धार्मिक और कस्टमाइज्ड वस्तुएं तैयार की जाती हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से उन्हें इस तरह के ऑर्डर मिलते रहते हैं।

हालांकि, इस बार मिला ऑर्डर उनके लिए खास था। पहली बार विदेश से भगवान सांवरिया सेठ के लिए विशेष सिल्वर आइटम तैयार करने का ऑर्डर मिला।

अंकित सोनी ने बताया कि स्विट्ज़रलैंड निवासी वंदना कुमारी भगवान सांवरिया सेठ को अपना भाई मानती हैं। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उन्होंने अपने आराध्य भाई के लिए विशेष रूप से प्योर सिल्वर राखी तैयार करवाने का फैसला किया। तैयार की गई यह राखी भगवान सांवरिया सेठ को श्रद्धापूर्वक भेंट की जानी है।

सिर्फ राखी नहीं, आस्था और भावनाओं का प्रतीक

देखने में यह राखी एक धार्मिक भेंट है, लेकिन इसके पीछे जुड़ी भावना इसे खास बनाती है। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करती है। इसी पारंपरिक भावना को वंदना कुमारी ने अपने आराध्य भगवान सांवरिया सेठ के साथ जोड़ा है।

एक तरफ विदेश में रहने वाली भक्त की भगवान के प्रति भाई जैसी आत्मीय भावना है और दूसरी तरफ देपालपुर के कारीगरों की पारंपरिक चांदी की कारीगरी। दोनों के मेल से तैयार हुई यह राखी अपने आप में एक अनोखी धार्मिक भेंट बन गई है।

देपालपुर की चांदी की कारीगरी को मिली नई पहचान

स्विट्ज़रलैंड से मिला यह ऑर्डर देपालपुर के स्थानीय कारीगरों के लिए भी खास माना जा रहा है। अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से धार्मिक सिल्वर आइटम्स के ऑर्डर हासिल करने वाले श्री नागेश्वर ज्वैलर्स को पहली बार विदेश से भगवान सांवरिया सेठ के लिए ऐसा ऑर्डर मिला है।

एक स्थानीय कारीगर द्वारा तैयार की गई प्योर सिल्वर राखी का स्विट्ज़रलैंड तक पहुंचना देपालपुर की पारंपरिक कारीगरी और स्थानीय हुनर के लिए गर्व की बात है। इससे यह भी पता चलता है कि छोटे शहरों में मौजूद पारंपरिक कला और हुनर को अब देश के बाहर भी पहचान मिल रही है।

देश-विदेश में बढ़ रही सांवरिया सेठ की आस्था

भगवान सांवरिया सेठ के प्रति भक्तों की श्रद्धा अलग-अलग रूपों में सामने आती रही है। कई भक्त उन्हें अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं, तो कई उनके साथ मित्र या परिवार के सदस्य जैसा रिश्ता महसूस करते हैं।

स्विट्ज़रलैंड की वंदना कुमारी द्वारा सांवरिया सेठ को अपना भाई मानकर उनके लिए राखी भेजना भी इसी व्यक्तिगत आस्था का उदाहरण है। यह घटना दिखाती है कि भक्ति किसी एक स्थान या सीमा तक सीमित नहीं रहती।

देपालपुर से स्विट्ज़रलैंड तक जुड़ी ‘भक्ति की डोर’

रक्षाबंधन पर तैयार की गई यह प्योर सिल्वर राखी देपालपुर से स्विट्ज़रलैंड तक जुड़ी आस्था की एक खास कड़ी बन गई है। हजारों किलोमीटर दूर रहने वाली भक्त की श्रद्धा और देपालपुर के कारीगरों के हुनर ने मिलकर इस राखी को खास बना दिया।

सांवरिया सेठ के लिए तैयार की गई यह विशेष राखी केवल चांदी से बनी एक धार्मिक वस्तु नहीं, बल्कि भक्ति, रिश्ते, भावनाओं और पारंपरिक कारीगरी के मेल की कहानी है। रक्षाबंधन के मौके पर सामने आई यह मिसाल बताती है कि आस्था की डोर भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे तक जुड़ सकती है।