उत्तराखण्ड के हरिद्वार में आम जनमानस को माया मोह से त्याग का पाठ पढ़ाने वाले साधु संत माया-मोह में इस कदर जकड़े हुए हैं कि हरिद्वार की एक संपत्ति को लेकर निरंजनी अखाड़े के संतों में आरोप-प्रत्यारोप की जंग चल रही है। निरंजनी अखाड़े से जुड़े साधु रामानंदपुरी ने रामानंद इंस्टिट्यूट नाम से एक विद्यालय की स्थापना की थी लेकिन अब अखाड़े ने उनकी गतिविधियों को देखते हुए रामानंदपुरी को इंस्टिट्यूट से हटाकर अखाड़े के ही दूसरे संत रविंद्रपुरी को चेयरमैन बना दिया गया है।
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