कौशाम्बी। कौशाम्बी में पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना को जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पलीता लगाया जा रहा है। जिला प्रशासन का खुले में शौच मुक्त यानी ओडीएफ का जो दावा है, वह हमारी पड़ताल में पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। शौचालय निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने से अब तक करोड़ो रूपये खर्च भी कर दिए गए इसके बावजूद भी ग्रामीण इलाके के लोग आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर हुई रैंकिंग के बाद कौशाम्बी जिले को देश में 20वां और प्रदेश में तीसरा स्थान मिला है। VIDEO
जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल ओझा का दावा है कि जिले के आठ विकास खण्डों के 476 गांव में 1 लाख 82 हजार 572 शौचालय निर्माण कार्य का लक्ष्य पूरा करने के बाद 30 सितंबर 2018 को कौशाम्बी जिला ओडीएफ घोषित किया जा चुका है. बेस लाइन सर्वे से बचे लोगो को योजना का लाभ देने की पहल भी हो रही है. इसके बावजूूूद भी ग्रामीण इलाको के लोग आज भी शौचालय व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वांछित रह गए है। ग्रामीणों की माने तो अधिकारियों को जिला घोषित करने की इतनी जल्दी पड़ी थी कि सभी मानकों को ताक पर रखकर शौचालय निर्माण कार्य का लक्ष्य पूरा तो कर लिया गया, लेकिन जब लाभार्थियों को उसे इस्तेमाल करने की बारी आई तो कुछ ही महीनों में बनवाए गए अधिकांश शौचालयों का समय से पहले गड्ढा भी भर गया और वह ध्वस्त भी हो गए।
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