Rewa Kalpana Mishra Case
Rewa News: रीवा में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला अब मध्य प्रदेश की राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में न्याय और स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने भोपाल स्थित वल्लभ भवन के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि क्या न्याय की मांग करना भी अपराध हो गया है। पार्टी ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार के ‘सुशासन’ पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के मुताबिक, 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की 26 अगस्त 2026 को रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद मौत हो गई थी।
परिवार की ओर से अस्पताल में लापरवाही के आरोप लगाए गए। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें महिला कथित तौर पर मदद की गुहार लगाती दिखाई दे रही थी।
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया तथा घटना की जांच के लिए समिति गठित की गई।
कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। उन्होंने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग भी की।
अभय मिश्रा का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
इसी मांग को लेकर उन्होंने भोपाल में वल्लभ भवन के बाहर धरना दिया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से उन्हें हिरासत में ले लिया।
अभय मिश्रा की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा।
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि “न्याय मांगना भी अपराध हो गया है क्या” और आरोप लगाया कि रीवा मामले में सवाल पूछने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि रीवा के सरकारी अस्पताल में लापरवाही की शिकायतों और घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही है।
हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। मामले की जांच और उपलब्ध आधिकारिक निष्कर्षों को इन आरोपों से अलग देखा जाना चाहिए।
कल्पना मिश्रा की मौत के बाद उनके परिवार ने अस्पताल में इलाज और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई और जांच शुरू की गई।
रिपोर्टों में अस्पताल प्रशासन की ओर से लापरवाही के आरोपों पर अलग पक्ष भी सामने आया है। ऐसे में मौत की वास्तविक वजह और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
कल्पना मिश्रा की मौत के बाद परिवार की ओर से न्याय की मांग की गई। इसके बाद मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया और कांग्रेस ने इसे प्रदेश सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना दिया। अभय मिश्रा के धरने और हिरासत के बाद अब कांग्रेस तथा भाजपा सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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