उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिवर्ष वैकुंठ चतुर्दशी पर निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी इस बार शहर में धारा 144 लागू होने के कारण परंपरा निभाने को बिना तामझाम के निकली। चांदी की पालकी में भगवान महाकाल के मुखौटे को विराजित कराया गया जबकि इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस बार अयोध्या मामले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और धारा 144 लागू होने के कारण पालकी पर सवार बाबा महाकाल के पुजारी एक झांझ और एक डमरू बजाने वाले भक्त को साथ रहने की अनुमति दी गई थी। वहीं सवारी निर्धारित मार्ग महाकाल घाटी, गुदरी बाजार से होकर गोपाल मंदिर पहुंची जहां भगवान महाकाल ने भगवान गोपाल जी से भेंट वार्ता की और दोनों देव ने सृष्टि के भार का आदान प्रदान किया। लगभग 11 बजे निकली पालकी यात्रा देर रात करीब 12 बजे वापस महाकाल लौटी।
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