मुख्य बिंदु (Highlights):
कराची के बाद लाहौर अमेरिकी कॉन्सुलेट पर उग्र भीड़ का हमला; इमारत में लगाई गई आग।
इस्लामाबाद में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू; उपद्रवियों को देखते ही ‘शूट-एट-साइट’ (गोली मारने) के आदेश।
ईरान में खामेनेई की मौत के बाद 40 दिनों के शोक का एलान, पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों का तांडव।
मिडिल ईस्ट में मचे कोहराम के कारण पाकिस्तान से 184 इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द।
Civil War Alert in Pakistan: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे काले दौर से गुजर रहा है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े महायुद्ध की तपिश अब पाकिस्तान की सड़कों पर साफ़ देखी जा सकती है। 1 मार्च 2026 को पाकिस्तान के दो सबसे बड़े शहरों—कराची और लाहौर—में स्थित अमेरिकी दूतावासों (US Consulates) को निशाना बनाया गया है।
कराची में भड़के दंगों के बाद, रविवार को लाहौर से भी दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आईं। यहाँ प्रदर्शनकारियों की हज़ारों की भीड़ ने सुरक्षा घेरा तोड़कर अमेरिकी कॉन्सुलेट के परिसर में प्रवेश किया और फर्नीचर व गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी खुलेआम अमेरिकी नागरिकों को दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर निशाना बनाने की धमकियां दे रहे हैं।
राजधानी इस्लामाबाद में हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि सरकार ने पूरे शहर को सेना के हवाले कर दिया है। शहर में सख्त कर्फ्यू लगा दिया गया है और ‘डिप्लोमैटिक एनक्लेव’ की सुरक्षा के लिए ‘देखते ही गोली मारने’ (Shoot at Sight) के आदेश जारी किए गए हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कराची और लाहौर में हुई झड़पों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, हालांकि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया अभी मौत के सटीक आंकड़ों की पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले (Operation Epic Fury/Lion’s Roar) में हुई मौत ने पूरे मुस्लिम जगत में गुस्सा भर दिया है। ईरान द्वारा 40 दिनों के राजकीय शोक के एलान के बाद पाकिस्तान के विभिन्न धार्मिक समूहों ने ‘जिहाद’ का आह्वान कर दिया है। खामेनेई के 37 साल के शासन के अंत को कट्टरपंथी समूह ‘इस्लाम पर हमला’ मान रहे हैं, जिसका नतीजा पाकिस्तान में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के रूप में दिख रहा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते हवाई खतरों और पाकिस्तान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) चरमरा गया है। 28 फरवरी से अब तक पाकिस्तान से खाड़ी देशों (UAE, कतर, बहरीन, कुवैत) के लिए जाने वाली 184 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। कराची, लाहौर और इस्लामाबाद के एयरपोर्ट्स पर हजारों मुसाफिर फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं।
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में अमेरिकी हितों को निशाना बनाया गया है।
1979: इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास को जला दिया गया था।
2002/2006: कराची कॉन्सुलेट के बाहर आत्मघाती बम धमाके हुए थे।
लेकिन 2026 की यह घटना इसलिए अलग है क्योंकि यह सीधे तौर पर एक ‘ग्लोबल वॉर’ (World War 3 की आहट) से जुड़ी हुई है।
आर्थिक बदहाली, डूरंड लाइन पर अफ़ग़ानिस्तान के साथ युद्ध और अब देश के अंदरूनी शहरों में भड़की यह हिंसा संकेत दे रही है कि पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। क्या पाकिस्तानी सेना इस उग्र भीड़ को नियंत्रित कर पाएगी या फिर पाकिस्तान भी सीरिया या लीबिया जैसी स्थिति की ओर बढ़ जाएगा?
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